शहर के प्रसिद्ध बालाजी धाम में आज एक ऐतिहासिक क्षण देखा गया, जब हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज की एक अत्यंत भव्य और विशाल प्रतिमा यहाँ उपस्थित हुई। इस अवसर पर बालाजी ग्रुप के सदस्यों और स्थानीय नागरिकों ने जय भवानी, जय शिवाजी के उद्घोष के साथ प्रतिमा का स्वागत किया।
प्रतिमा की भव्यता और विशेषताएं
जानकारी के अनुसार, यह प्रतिमा अपने आप में अद्भुत शिल्पकला का उदाहरण है।
* ऊंचाई: 11 फीट
* वजन: लगभग 10 टन
यह विशालकाय प्रतिमा शिवाजी महाराज के शौर्य और दृढ़ता को दर्शाती है।श्री रितेश गोयल
इस अवसर पर बालाजी ग्रुप के संस्थापक श्री रितेश गोयल जी ने अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा:
यह बालाजी ग्रुप का परम सौभाग्य है कि छत्रपति शिवाजी महाराज की यह भव्य प्रतिमा सबसे पहले बालाजी धाम प्रांगण में पधारी है। हम इसे ईश्वर का आशीर्वाद और अपना गौरव मानते हैं।
कल निकलेगी ऐतिहासिक शोभायात्रा (रूट मैप)
कल इस भव्य प्रतिमा को शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए अपने निर्धारित स्थान पर ले जाया जाएगा। शोभायात्रा का रूट इस प्रकार तय किया गया है:
* इंदौर नाका (प्रारंभ)
* पड़ावा चौक
* नगर निगम
* घंटाघर
* रेलवे स्टेशन
* टपाल चाल चौक (समापन)
शहरवासियों से अनुरोध किया गया है कि वे इस शोभायात्रा में शामिल होकर छत्रपति शिवाजी महाराज का स्वागत करें।
छत्रपति शिवाजी महाराज (1630-1680) भारत के महानतम योद्धाओं और शासकों में से एक थे। उन्हें ;हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक के रूप में पूजा जाता है। शिवाजी महाराज को गुरिल्ला युद्ध; (छापामार युद्ध) तकनीक का जनक माना जाता है। उन्होंने अपनी छोटी सेना के साथ मुगलों और आदिलशाही सल्तनत की विशाल सेनाओं को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था।
एक योद्धा होने के साथ-साथ वे एक कुशल प्रशासक भी थे। उन्होंने अपनी प्रजा के लिए न्यायपूर्ण व्यवस्था बनाई, महिलाओं का सम्मान सुनिश्चित किया और मराठी भाषा को राजकाज में बढ़ावा दिया।
उन्हें ;भारतीय नौसेना का पितामह भी कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने भारत में सबसे पहले एक मजबूत समुद्री सेना (Navy) के महत्व को समझा और उसका निर्माण किया।
शिवाजी महाराज केवल एक राजा नहीं, बल्कि साहस, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति के अमर प्रतीक हैं।